हमारी सोच पर एक बार मनन करें

   मनन करे !

 भीष्म का संकल्प बासना रहित संयम है ,
हमारा संकल्प संयम-रहित बासना है ।

कर्ण के दंभ से दान है ,
हमारा दान ही दंभ है ।

द्रोपदी की पुकार,भक्ति है ,
हमारी भक्ति ,पुकार है ।

अंगद की सच्चाई में दृणता है ,
हमारी दृणता में सच्चाई है ।

जटायु की लड़ाई में धर्म है ,
हमारे धर्म मे लड़ाई है ।

अहिल्या की जड़ता में प्रायश्चित्त है ,
हमारे प्रायश्चित में जड़ता है ।

मंथरा की बक्रता में बफादारी है ,
हमारी बफदारी में बक्रता है ।

गुहा की संका में शक्ति है ,
हमारी भक्ति में संका है ।

श्रवण के कष्ट में सेवा है ,
हमारी सेवा में कष्ट है ।

नारद के झगड़े कराने में जन – सेवा है
हमारी जन – सेवा में झगड़े कराना है ।

अजामिल के बिकार में अलिप्सा है ,
हमारी अलिप्सा में बिकार है ।

सुदामा की दरिद्रता में उदारता है ,
हमारी उदारता में दरिद्रता है ।

साबित्री के स्वार्थ में अर्थ है ,
हमारे अर्थ में स्वार्थ है ।

अभिमन्यु की मृत्यु जीवन है ,
हमारा जीवन मृत्यू है ।

घटोत्कच की दुर्जनता में संस्कार है ,
हमारे संस्कार में दुर्जनता है ।

शंकराचार्य के गणित में ज्ञान है , हमारे ज्ञान में गणित है ।

मीर बावली बनकर भी भक्त है ।
हम भक्त बनकर भी बावले हैं ।

सूरदास के अंधेरे में भी रोशनी है ,
हमारी रोशनी में भी अंधेरा है है ।

कबीर के धंधे धंधे में पूजा है ,
हमारी पूजा में धंधा है ।

रामकृष्ण परमहंस के संसार में सन्यास है ,
हमारे संन्यास में संसार है में संसार है ।

महाराणा प्रताप के इंतजार में इंकलाब है ,
हमारे इंकलाब में इंतजार है ,

शिवाजी के हिंदुत्व में राष्ट्रप्रेम है ,
हमारे राष्ट्रप्रेम में हिंदुत्व है ।

बीरबल की मखौल में में सार है ,
हमारे सार में मखौल है ।

मालवीय जी की भिक्षा मे परोपकार है ,
हमारे परोपकार में भिक्षा है ।

गांधी जी राम नाम बार बार लेते थे कि उनसे भूल ना हो जाए , हम भूल से राम नाम लेते हैं ।

विनोबा भाबे की प्रज्ञा स्थिर है , और काया चंचल है । हमारी काया स्थिर है , प्रज्ञा चंचल है ।

लेखक

कमलेश गुप्ता (खजुराहो) (म.प्र)

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