I. 1:कलयुग मे अदभुत चम्तकार ,सिरिती का उलघन, प्रामात्मा के नियामो का उलघन,

 कलयुग मे अदभुत चम्तकार ,सिरिती का उलघन, प्रामात्मा के नियामो   का उलघन

   1  कलयुग मे अदभुत चम्तकार

कलयुग मे अदभुत चम्तकार ,सिरिती का उलघन, प्रामात्मा के नियामो   का उलघन
हमारे कलयुग मे वेद, शास्त्र, गीता, रामायण, ये कहता हे कि इस कलयुग मे जो आया हे वो जाये गा, किसी को मानव को अमरत्य का वरदान नही दिया जाये गा लेकिन एसा चमत्कार हुवा हे, आप लोग माता   मैहर देवी का मंदिर आप लोगो ने जरूर सुना होगा, जो आज मैहर देवी व शारदा देवी मंदिर के नाम से प्रसिद् हे,

कलयुग मे अदभुत चम्तकार ,सिरिती का उलघन, प्रामात्मा के नियामो   का उलघन

जो मध्य प्रदेश के सतना जिले मे मैहर तहसील के पास करीब 5 किलो मीटर की दुरी पर त्रिकूट पर्वत चोटी पर, मैहर देवी व शारदा देवी मंदिर बना हुवा हे, उस मंदिर का अदभुत चम्तकार ये हे कि मे वहा गया और वहा के लोगो ने बताया कि अल्हा, उदल आज भी इस मा शारदा देवी के मंदिर मे 3 से 4 बजे के बीच आकर पूजा अर्चना करके चले जाते हे, परन्तु आज तक आल्हा उदल वहा के किसी मानव को अपना दर्शन नही दिया हे, वहा के लोगो को मा मैहर देवी व शारदा देवी से आपार अस्था व अटूट विशवास हे कि, जब उस मंदिर के परिसर मे शाम 8 बजे से लेकर सुबह 6 बजे तक कोई मानव आदमी वहा नही रहता हे तो 3 से 4 बजे के बीच कोन आता हे, वहा के लोगो ने बाताया कि आल्हा उदल मा शारदा देवी  के बहुत बडे भक्त थे वहा के लोगो ने बताया कि पृथ्वीराज चौहान के साथ उनका युद्ध हुवा था वो भी मा शारदा देवी के भक्त थे, इन दोनो ने मा शारदा देवी का खोज किया, उसके बाद आल्हा ने उस मंदिर मे 12 साल तक तापस्या किया, तब मा शारदा देवी खुश हुई, और आल्हा को अमरत्व का वरदान दिया,आल्हा माता को शारदा माई कह कर पुकारा करता था।

तभी से ये मंदिर भी माता शारदा माई के नाम से प्रसिद्ध हो गया,  और उस पर्वत की चोटी पर श्री काल भैरवी, भगवान, हनुमान जी, देवी काली, दुर्गा, श्री गौरी शंकर, शेष नाग, फूलमति माता, ब्रह्म देव और जलापा देवी का भी मंदिर बना हे, उनका भी लोग पूजा अर्चना करते हे मंदिर करीब 2 किलो मीटर की दुरी पर एक तालाब हे, जिसे आल्हा तालाब कहा जाता हे, उसी तालाब के एक किलो मीटर की दूरी पर एकअखाडा हे, जहा  आल्हा उदल कुर्सी लडाते थे 

 2   क्या हे मंदिर का रहस्य

प्रामात्मा के नियामो   का उलघन माना जाता है कि दक्ष प्रजापति की पुत्री सती शिव से विवाह करना चाहती थी। उनकी यह इच्छा राजा दक्ष को मंजूर नहीं था,वो शिव को भूतों और अघोरियों का साथी मानते थ

इस लिये सती जी का विवाह भगवान शिव से  नही करना चाहते थे, लेकिन होनी को कोन टाट सकता हे इस लिये सतीजी का विवाह भगवान शंकर जी से  विवाह सम्पन हो गया,

एक बार राजा दक्ष ने यज्ञ करवाया था, उस यज्ञ में ब्रह्मा, विष्णु, इंद्र और अन्य देवी-देवताओं को आमंत्रित किया था, लेकिन जान-बूझकर अपने जमाता भगवान शंकर जी को नहीं बुलाया था,  शंकर जी की पत्नी और राजा दक्ष की पुत्री सती इससे बहुत दुखी थी फिर भी सती जी ने भगवान से विनती व प्रार्थना करके मनाया फिर शिव जी बोले देवी आप जाय हम बिना निमंत्ण के नही जा सकते,

उसके बाद शिव जी फिर समाधी मे लीन हो गये, उसके बाद सती जी ने नंदी अपने पिता  राजा दक्ष  के यज्ञशाला मे पहुच गयी, वहा पर उपस्तित सभी देवी दारा पूर्ण मान समान न मिलने मा सती जी को बहुत दुख हुवा, फिर भी सती ने सहन किया और सोचा  ये तो गैर हे, लेकिन जब अपने पिता जी ही दारा अपमान किया गया तो, सती जी सहन नही कर पायी  ओर वो यज्ञ के कुण्ड मे कुद कर प्राणाहुति दे दी,

भगवान शंकर जी को जब इस दुर्घटना का पता चला, तो क्रोध से उनका तीसरा नेत्र खुल और अप्ने जता को पटका तो उसमे से वीरभद प्रकट हुवा वीरभद ने कहा प्रभू मेरे लिये क्या आदेश हे, फिरशिव जी ने कहा वीरभद तुम राजादक्ष के यज्ञशाला को तहस नहस कर दो और जो बोले उसको मारो, वीरभद ने भगवान शिव जी के आदेशो का पूर्ण रूप से निर्वहन किया, और राजादक्ष के यज्ञशाला को तहस नहस कर दिया

उन्होंने यज्ञ कुंड से सती के पार्थिव शरीर को निकाल कर कंधे पर उठा लिया और गुस्से में तांडव करने लगे। ब्रह्मांड की भलाई के लिए भगवान विष्णु ने ही सती के शरीर को 52 भागों में विभाजित कर दिया। जहां भी सती के अंग गिरे, वहां शक्तिपीठों का निर्माण हुआ।माना जाता है कि यहां मां का हार गिरा था। 

सतना का मैहर मंदिर शक्ति पीठ नहीं है। फिर भी लोगों की आस्था इतनी ज्यादा है कि यहां सालों से माता के दर्शन के लिए भक्तों का मेला लगा रहता है।                        

मंदिर केसे पहुचे 

गोंडा व फेजाबाद मंडल वालो के लिये या से गोंडा  गोंडा  से इलाहाबाद फिर सतना के लिये बस व रेल

लेखन  :-        अविनाश श्रीवास्तव

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3 Comments on “I. 1:कलयुग मे अदभुत चम्तकार ,सिरिती का उलघन, प्रामात्मा के नियामो का उलघन,”

  1. हम अपने ही इतिहास की गौरवगाथा को नहीं जानते हैं | ऐसे में आपके द्वारा दी गई यह जानकारी रोचक लगी |

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