महिलाओ की स्तिथि

 महिलाओ की स्तिथि

महिलाओ की स्तिथि हम दो सौ साल पहले देखे तो उस समय लडकियों को स्कूल और कॉलेज में पढ़ना असाधारण बात थी| कम उम्र में उनकी शादी कर दी जाती थी| पर्दा प्रथा के कारण  वे सामाजिक और राजनितिक जीवन में भाग नहीं लेती थी | विधवाओ की दोबारा विवाह करने की इजाजत नहीं थी उनका जीवन अकेलापन और कठिनाईओमें बिताता था हिन्दू समाज में विधवाओ को सटी होना पड़ता था|

अपने मरे हुए पति के साथ चिता पर उन्हें जला दिया जाता था | समाज में पुरषों को सारी सुविधायें प्राप्त थी और महिलाये इन सब से वंचित थी | धर्म और संस्कृत के नाम पर उनके साथ भेद -भाव किया जाता था |

लेकिन आज के ज़माने की बात करे तो आज अधिकतर लडकिया स्कूल जाती है | और लडको के साथ भी पढ़ती है बड़ी होने पर कॉलेज और विश्वविधालय जाती है नौकरी भी करती है उनके विवाह की उम्र कानून द्वारा तय है यह विवाह किसी भी जाती या समुदाय में हो सकता है विधवाये दोबारा विवाह कर सकती है पुरषों की तरह वोट डाल सकती है चुनाव लड़ सकती है इस प्रकार उनकी स्तिथि में काफी सुधार आया है |

 

5 Comments on “महिलाओ की स्तिथि”

  1. स्त्री पुरूष एक समान की सामाजिक व्यवस्था होनी चाहिए।

  2. महिलाओं की स्थिति की तुलना जो पुरातन व आधुनिक के रूप में की गई है वह , सराहनीय है । लेकिन आज भी ये पुरुष प्रधान समाज महिलाओ को बराबरी का दर्जा देने में कतरा रहे हैं। अभी भी महिलाओं को संघर्ष की आवश्यकता है।

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