आनलाइन ठगी : कब क्यों कैसे?

 

आनलाइन ठगी कब और कैसे? 

आनलाइन ठगी :कब क्यों कैसे?

पढकर ही आप समझ गए होंगे कि यहां पर हम

आज आपको यह बताने वाले हैं कि

अब पुराना जमाना बीत गया है ।

आज उस ठगी प्रथा का अंत हो चुका है जिसका अंत

लार्ड विलियम बैंटिक ने बहुत पहले कर दिया था ।

ठगी प्रथा के तब कई तरीके होते थे ।

कुछ लोग राह चलते लोगों को गला घोंट कर लूट लेते थे तो वहीं ,

कुछ लोग तत्कालीन सड़क किनारे स्थापित सरांय नामक जगह में ,

आराम कर रहे लोगों को बेहोश करके लूट लेते थे ।

फिर आया जमाना नकब काटकर चोरी करने का और फिर इसके बाद नम्बर आता है,

जहर खुरानी की अद्भुत लीला का ।

जब लोग जहर खाने से इन्कार करने लगे

यानी प्रसाद के नाम पर,नाश्ता के नाम पर,

भोजन और पानी के नाम पर

बेवकूफी करना छोड़ दिया,

तो जमाना आया,

इसकी टोपी उसका सिर की तकनीक यानी पोंजी स्कीम  का।

तभी नटवरलाल भी अपना स्वर्णिम प्रदर्शन करते हुए पाए गए हैं ।

नया जमाना तो ठगी की नई तकनीक भी 

आप अगर सोचते हैं  कि जमाने के साथ केवल भले लोग चलते हैं तो,  आप गलत हैं ।

क्यों कि सच यह है कि जमाने के साथ बुरे लोग कहीं ,ज्यादा चलते हैं ।

तू डाल डाल मैं पात पात की तर्ज पर चलने वाले ,

कुछ ठग

आज आनलाइन दुनिया में बड़ी सिद्दत से प्रकट हुए हैं ।

पलक झपकते ही अपने हुनर की बाजीगरी से ये शातिर ,

पल भर में  आपका बटुआ  ही नहीं पूरा-पूरा बैंक खाली कर देते हैं ।

और अपना मकसद पूरा करके पतली गली से नहीं ,

बल्कि पतली गली के ऊपर से निकल जाते हैं।

 

और हम आप सब नीचे इनका इंतजार ही करते रह जाते हैं ।

आनलाइन ठगी क्या है? 

आनलाइन ठगी क्या है?

अगर यह आपका सवाल है तो शायद यह सबसे बड़ा मजाक है आपका।

क्यों कि हम सब लोग आज सिर्फ इसे जानते ही नहीं ,

बल्कि हर रोज इसके शिकार भी हो रहे हैं ।

कभी लाटरी के पैसों के नाम पर तो ,

कभी बीमा के नाम पर या फिर किसी स्कीम के नाम पर ।

हाल यह है कि जिस इन्टरनेट ने हमें ,

एक तरफ जमाने भर का सुकून दिया है तो,दूसरी ओर इसी इन्टरनेट ने हमें ,

जमाने भर की ठगी का मोहताज भी बना दिया है ।

आपके घर की चारदीवारी कितनी भी ऊंची क्यों न हो ,

आज शातिर आनलाइन ठग पलक झपकते ही

आपको कंगाल बना कर खुद को मालामाल बना लेते हैं ।

यह ठग इस चोरी चकारी के लिए आपके सामने कतई नहीं आते ,

बल्कि मात्र कुछ अंको को इधर-उधर करके, या कीबोर्ड पर अपना हांथ फेरकर या ,

फिर कोई कोड बदलकर ही अपना मकसद बड़ी सफाई से पूरा कर लेते हैं ।

क्रेडिट इनफॉर्मेशन कंपनी एक्स पेरियन और इंटर नेशनल डाटा कार्प ने ,

एक खुलासा करके सब को चौंका दिया है ।

कंपनी का कहना है कि एशिया प्रशांत क्षेत्र में,

 डिजिटल  ठगी के मामले में भारत का स्थान दूसरा है।

कार लोन, पर्सनल लोन में गजब की धोखाधड़ी के डिजिटल प्रमाण मिले हैं,

जो यह बताते हैं कि भले ही भले लोग भलाई में पिछड़े हैं,

लेकिन बुरे लोग बुराई में डिजिटल सौगात से काफी आगे निकल गए हैं ।

कब मिलते हैं ठगी के मौके 

कहा जाता है कि कोई कितना भी होशियार क्यों न हो ,

वह जरूर कोई न कोई कभी न कभी गलती कर ही जाता है ।

हां दोस्तों ,हमारी आपकी यही गलती ठगों की चांदी बन जाती है ।

कई बार हम अपनी सारी सूचनाओं को सोशल साइट्स पर डाल देते हैं ,

जिनकी मदद से ठगी के स्वामी हमें ठग लेने में कामयाब हो जाते हैं ।

इसी तरह की और भी गलती हम करते हैं, जिनकी वजह से लुटेरों को मदद मिलती है ।

आइए जानते हैं इसी तरह की वह कौन कौन सी गलतियां हम करते हैं ,

जिनकी वजह से हमें ठगी का शिकार होना पड़ता है :

●अपनी सोशल साइट्स पर नाम, पता, ईमेल, जन्म तिथि, लिंग,

और मोबाइल नंबर डालना ।

●मदर्स डे, फादर्स डे, वीमेंस डे, के नाम पर अपनी

मां, पत्नी, पिता या बच्ची का फोटो आदि शेयर करना ।

● शादीशुदा लोगों का अपने खास इवेंट्स की तस्वीर आदि डालना ।

निष्कर्ष अभी भी थोड़ा अलग है ।

जी हां ,वह यह है कि विद्वान और वैज्ञानिक दोनों कहते हैं कि,

अभी भी दुनिया में कोई परफेक्ट क्राइम नहीं बना ।

मतलब यह कि आज तक कोई ऐसा नहीं हुआ जो क्राइम के बाद पकड़ा न गया हो ।

यह सही है या झूठ यह तो वैज्ञानिक जानें लेकिन ,

यहां मेरे अपने विचार यह हैं कि  

● अगर हम लालच न करें

●अगर हम लापरवाही न करें

●अगर हम बेवजह किसी पर यकीन न करें तो ,

●दुनिया की कोई ताकत हमें ठगी का शिकार नहीं बना सकती ।

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा10082018 

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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