दालचीनी : एक दिव्य औषधि , Dal chini ek divy aushdhi

दालचीनी : एक दिव्य औषधि , Dalchini ek divy aushdhi

        दालचीनी:   दोस्तों यूँ तो हम बहुत से मसाले दैनिक उपयोग में लातें हैं। जिनकी महत्ता के बारे में हम नहीं जानते केवल उन्हें हम स्वाद के लिए ही उपयोग करते हैं ।
मसाले केवल स्वाद ही नहीं बढ़ाते बल्कि हमारे शरीर के लिए औषधि का काम भी करते हैं। दालचीनी भी इन्ही मसालों में से एक है। जो हमारे लिए बहुत ही लाभ दायक है। पोस्ट के माध्यम से दालचीनी के इन्ही औषधीय गुणों के बारे में चर्चा करेंगे ।

परिचय :-

           दालचीनी लौरसाई (lauraceae) परिवार से सम्बन्ध रखने वाला पौधा है। जिसकी लम्बाई 30 से 50 फिट के बीच में होती है। यह एक सदा बहार पौधा है। यह गर्म स्थानों पर मुख्यतः पाया जाता है |

अन्य नाम :-

           दालचीनी को भिन्न भिन्न भाषाओँ में अलग अलग नामों से जाना जाता है । संस्कृत में ” त्वाक “,के नाम से जाना जाता है | अंग्रेजी में “cinnamon”और मराठी में “कलमी” आदि के नाम से पुकारा जाता है।

स्वभाव :-

          दालचीनी गर्म स्वभाव की औषधि होती है। यह पाचक ,रक्त शोधक और वायु और कफ का नाश करने वाली होती है। इसका उपयोग बहुआयामी है |
इसके अत्यधिक उपयोग से किडनी को हानि पहुँच सकती है। इसलिए इसका उपयोग ज्यादा समय तक नहीं करना चाहिए |

पाये जाने का स्थान :-

          दालचीनी का पौधा प्राय: उष्ण स्थानों पर पाया जाता है। इसलिए यह एशिया में ,  भारत के दक्षिणी राज्यों , श्रीलंका , बांग्लादेश में पायी जाती है  | अन्य  स्थानों  जैसे -जावा , सुमात्रा , ब्राजील ,वेस्ट इंडीज व वियतनाम में अधिकांशतः पाया जाता है।

                                                

दालचीनी के उपयोग :-

        यूँ तो दाल चीनी एक महा औषधि के रूप में जानी जाती है | औषधीय गुण होने के कारण बहुत उपयोगी है । दाल चीनी को विभिन्न रोगों के उपचार में प्रयोग में लाया जाता है । दालचीनी का तेल भी बहुत उपयोगी होता है | जिन रोगों में यह ज्यादा  प्रयोग में ली जाती है वो  इस प्रकार हैं।

 

  1. पुरुषों के वीर्य बढाने के लिए :- दालचीनी के पाउडर को 3-3 ग्राम की मात्रा में सुबह शाम दूध के साथ लेते है  | तो यह वीर्य को पुष्ट करती है | और वीर्य की मात्रा बढ़ाती है। सेक्स सम्बन्धी सभी रोगों में भी फायदा करती है |
  2. पेट रोगों के लिए :- दालचीनी के पाचक  होती है | इस  कारण इसका प्रयोग पेट के तमाम रोगों जैसे -कब्ज , गैस , अमलता और खट्टी डकार आदि के लिए किया जाता है।
  3. सर्दी – जुकाम के लिए :- २ ग्राम दालचीनी के पाउडर को १ चम्मच शहद के साथ मिला लें | मिला कर चाटने से सर्दी व् जुकाम में लाभ मिलता है।
  4. श्वाश रोगों के लिए :- दालचीनी का स्वभाव उष्ण होने के कारण यह श्वाश रोगों में लाभकारी होती है। श्वाश नली और फेफड़ों पर भी अच्छा प्रभाव डालती है |
  5. मूत्र संसथान के विकार के लिए :- आधा चम्मच पाउडर को १ चम्मच शहद में मिला  लें | मिला कर चाटने  से सभी मूत्र विकारों में आराम आता है। 
  6. विभिन्न प्रकार के दर्दों के लिए :- १ चम्मच शहद में १/२ चम्मच दालचीनी के पाउडर को मिला लें | और इसे सुबह और शाम चाटने से मांसपेशी के हर प्रकार के दर्द में बहुत लाभ होता है ।
  7. रक्त के कोलेस्ट्रोल के लिए :- १ चम्मच दाल चीनी के पाउडर को १ चम्मच शहद में मिला लें | ऐसा से कोलेस्ट्रोल का लेवल कम होने में मदद मिलती है।
  8. त्वचा सम्बन्धी विकारों के लिए :-१ चम्मच दालचीनी पाउडर को २ कप पानी में उबाल  लें | उसमें २ चम्मच शहद घोल कर नित्य पीने से त्वचा के फंगल इन्फेक्सन समाप्त हो जाते हैं। तथा त्वचा लचीली व् मुलायम हो जाती है जिससे झुर्रियां नहीं आती। चेहरा एक दम से चमकने लगा है |
  9. वजन कम करने के लिए :- १ कप पानी में १/२ चम्मच दालचीनी पाउडर दाल कर उबाल लें | और १ चम्मच शहद मिला कर रोजाना पीने से वजन तेजी से घटता है । और इसके द्वारा घटाया गया वजन वापस भी कम आता है | 
  10. बवाशीर के लिए :- १/२ चम्मच दालचीनी पाउडर को १ चम्मच शहद में मिला कर नित्य खाने से बवाशीर में आराम आता है।

दालचीनी से होने वाली हानियाँ :-

       यूँ तो दालचीनी एक महान औषधि के रूप में जानी जाती है | यह स्वभाव में गरम होती है |   सही मात्रा में खाने से कोई नुक्सान नहीं पहुंचती है |
लेकिन आधिक मात्रा व लम्बे समय तक लेने से इसके कुछ दुष्प्रभाव भी हो जाते हैं । इसलिए दालचीनी का प्रयोग लम्बे समय तक नहीं करना चाहिए। अगर जरुरत पड़े तो कुछ दिन रुक कर इसका उपयोग दोबारा से करना चाहिए |

नोट :-

        दालचीनी का उपयोग अधिक मात्रा व लंबे समय तक नही करना चाहिए।

9 Comments on “दालचीनी : एक दिव्य औषधि , Dal chini ek divy aushdhi”

  1. शुक्रिया भाई जी
    दालचीनी गर्म स्वभाव की होती है इस लिए लम्बे समय तक प्रयोग नहीं करनी चाहिए

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