माँ और पत्नी भाग – 2 Maa aur Patni Part – 2

माँ और पत्नी भाग – 2 Maa aur Patni Part – 2

माँ और पत्नी, दोस्तों, जैसा कि हम पहले भाग में पढ़ चुके हैं कि एक पुरूष के जीवन में माँ का क्या किरदार होता है । अगर आपने उस भाग को नहीं पढ़ा है तो कृपया पहले उस भाग को पढ़ लें उसका लिंक निचे दिया हुआ है । 

दोस्तों, आज हम जानने की कोशिश करेंगे कि एक पुरुष के जीवन में उसकी पत्नी का क्या योगदान होता है ।

सहनशीलता का प्रतीक – 

दोस्तों, एक लड़की जब दुल्हन बनकर, अपने माता-पिता, भाई-बहन, सारे रिश्ते-रिश्तेदार छोड़कर अपने ससुराल आती है तो उसके लिए हर चीज़ नई होती है । लोग नए होते हैं, उनका रहन-सहन नया होता है । उसे इस स्थिति को स्वीकार करने में कितनी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है इस बात को एक पुरुष शायद ही समझ सकता है । फिर भी वो इस माहौल में अपने आप को ऐसे मिला देती है मानो इसी माहौल में उसका सारा जीवन गुजरा हो । वह अपने ससुराल वालों को इस बात का एहसास भी नहीं होने देती कि वो जहाँ से आई है वहां के रीति-रिवाज़ और यहां के रीति-रिवाज़ में कितनी भिन्नता है । फिर भी वह कितने ही तानों और अत्याचारों को सहती है । और तो और पति के द्वारा भी किये जा रहे अत्याचारों को सहती है फिर भी कुछ नहीं कहती ।

समझौता करने में माहिर –

पत्नी बन जाने के बाद अधिकतर स्त्रियां अपनी परिस्थितियों के साथ समझौता कर लेती हैं और उस माहौल को अपनाने में कोई कसर नहीं छोड़ती जिसमें अब उसकी पूरी जिंदगी गुजरने वाली होती है । यदि उसे अपने पति के लिए कोई कार्य करना पड़े, चाहे वो कार्य उसकी इच्छा के विपरीत ही क्यों न हो, फिर भी उस कार्य को बड़ी ही ख़ुशी से करती है ।

पति का दर्द बाँटने वाली –

पत्नी अपने पति के हर दर्द को बाँटती है । पति जब सामाजिक, आर्थिक समस्याओं को झेलता है तब उसका दर्द बाँटने वाली, उसकी स्थिति समझने वाली सबसे अच्छी दोस्त उसकी पत्नी ही होती है । और सही दिशा निर्देश भी देती है । पति दिन-भर का थका हुआ घर वापस आता है तो अपने प्यार के दो मीठे बोल बोलकर उसकी सारी थकान और परेशानियों को पल में गायब कर देती है । पति के हाथ, पैर, पीठ और सिर दबाकर उसके शारीरिक दर्द भी मिटाती है । भारत जैसे देश में ये एक आम बात है ।

घर की मैनेजर –

पत्नियाँ अपने घर की मैनेजर होती हैं । चुकि पति को बाहरी काम-काज से फुर्सत नहीं मिलती कि वो घर के रख-रखाव पर ध्यान दे सके ऐसे में पत्नियाँ अपने कर्तव्य को बखूबी समझती हैं । घर में किन-किन चीजों की कब-कब आवश्यकता है इन्हें अच्छे से पता होता है । अतः वह इसे किसी न किसी तरह मैनेज जरूर करती हैं । इसलिये वह एक अच्छी घरेलू मैनेजर साबित होती हैं ।

अतिरिक्त गुल्लक –

पत्नियाँ बचत करने में माहिर होती हैं । वह अच्छी से अच्छी और बुरी से बुरी परिस्थिति में भी थोड़ा-थोड़ा धन बचाकर रखती हैं जो कुछ समय बाद इकट्ठा होकर अच्छी-ख़ासी रकम हो जाता है । जिससे किसी जरूरी काम को किया जा सकता है । विशेष परिस्थितियों में पत्नी द्वारा इकट्ठा किया गया धन बहुत ही काम आता है ।

बुढ़ापे  में माँ जैसी –

प्रायः भारत जैसे देश में ऐसा अक्सर देखने को मिलता है कि जब बच्चे बड़े हो जाते हैं तो अपने माता-पिता का साथ छोड़ देते हैं । अथवा साथ रहते भी हैं तो भी वह उनकी देखरेख करने में कोताही बरतने हैं । ऐसे में अगर पति की तबीयत खराब हो जाती है तो पत्नी बिल्कुल उसकी मां की तरह, उसकी सेवा करती है । जिस तरह मां अपने बच्चे की सेवा, चाहे वह टट्टी-पेशाब कुछ भी करें बड़े ही प्यार से करती है । उसी तरह पत्नी भी तनिक भी घृणा किए बगैर अपने पति की सेवा करती है । और मरते दम तक उसका साथ नहीं छोड़ती ।

दोस्तों, एक लड़की जब अपना घर छोड़कर अपने पति के घर आती है तो वह पत्नी बन जाती है । वह अपने घर में सबसे पहले खाना खाने वाली होती है, लेकिन ससुराल आने पर वह सबसे बाद में खाती है । अपने घर में छोटी से छोटी चीज के लिए जिद कर  करती है और यहां आकर अपनी परिस्थितियों से समझौता कर लेती है । अपने मां-बाप की सबसे प्यारी होती है और ससुराल आने पर वह आंखों की किरकिरी भी बन जाती है । फिर भी जीवन के हर मोड़ पर अपने पति का साथ निभाती है ।चाहे दुख हो या सुख हो वह अपने पति का साथ कभी नहीं छोड़ती । इसीलिए तो पत्नी को अर्धांगिनी कहा गया है।

दोस्तों, बाकी अगले भाग में ।

धन्यवाद ।

एस के भारती

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