भारतीय व पाश्चात्य सभ्यता एक अध्यन

भारतीय व पाश्चात्य सभ्यता एक अध्यन

 

 

 

भारतीय व पाश्चात्य सभ्यता एक अध्यन —-  दोनों ही सभ्य्तायों की अपनी अपनी विशेषताएं हैं दोनों सभ्यताएं एक दुसरे से एकदम अलग हैं |यहाँ भारतीय सभ्यता का आधार धर्म, अर्थ ,काम और  मोक्ष हैं वहीँ पाश्चात्य  सभ्यता में अर्थ और काम की ही प्रधानता है|हम भी आधुनिकता के नाम पर अपना पश्चिमीकरण  करते जा रहे हैं|

आज हम पाश्चात्य संस्कृति का अंधाधुंध अनुकरण करते जा रहे हैं पर कभी हमने दोनों संस्कृतियों के बीच जो उद्गम स्थान ,पारिस्थितिक तंत्र ,जलवायु,विचारधारा ,गुण ,धर्म -कर्म के बीच का  अंतर है उस  को कभी  समझने का प्रयत्न ही नहीं किया केवल अन्धा अनुकरण  ही करते चले गये |आज पश्चिमी देश भी हमारी सभ्यता से मैडिटेशन  ,योग ,आयुर्वेद,होम्योपैथी ,यूनानी  को अपना रहे हैं व पेटेंट करा रहे हैं |हम पश्चिमी सभ्यता से प्रभावित होकर वहां के खान-पान,पहनावा ,रहन -सहन,तकनीकी,शिक्षा प्रणाली को  बिना स्थिति ,जलवायु ,प्रकृति का अंतर किये अपनाये जा रहे हैं |किसी भी संस्कृति को अपनाने से पहले उसके अनुकूलन , उपयोगिता,अनुपयोगिता  को अपने देश  काल,परिस्थिति के अनुसार नापना  आवश्यक है|फिर भी  पाश्चात्य सभ्यता में बहुत सी ऐसी बातें हैं जिन्हें हम अपना सकते हैं लेकिन अपनी संस्कृति को साथ में   शामिल करके क्योंकि जो राष्ट्र अपनी संस्कृति भूल जाता है उसका बच पाना मुश्किल होता है |आइये जानते हैं भारतीय व पाश्चात्य सभयता में क्या,क्या विशेषताएं हैं |

जलवायु 

भारत की जलवायु बहुत अच्छी है एक तो यहाँ नदियाँ हैं दुसरे यहाँ सूरज भी हम पर मेहरबान है|इसलिए यहाँ खेती बहुत अच्छी होती है| यूरोप में अच्छी खेती नहीं हो सकती क्योंकि वहां साल के आठ महीने तो सूर्य ही नहीं उगता किसी भी उत्पादन के लिए सूर्य का प्रकाश कितना अनिवार्य है ये हम सभी जानते हैं साथ ही अच्छे उत्पाद के लिए कोमल व उपजाऊ भूमि भी आवश्यक है जो वहां नहीं मिलती वहां की मिटटी बर्फ पड़ने के कारण पत्थर बन जाती है साथ ही अच्छी खेती के लिए बारिश भी आवश्यक है जो वहां निश्चित नहीं है क्योंकि सूरज न निकलने के कारण वहां वाष्पीकरण प्रक्रिया नहीं हो पाती,दबाव क्षेत्र नहीं बन पाता ऐसे  में वहां अच्छी खेती नहीं होती तो डिब्बा बंद व कोल्ड स्टोरेज फ़ूड खाना उनकी मजबूरी है| पर हमारा देश यहाँ हर समय ताजा  सब्जी, फल ,अनाज,भोजन उपलब्ध है तो हमे ये डिब्बाबंद ,कोल्ड स्टोरेज फ़ूड क्यूँ खाने चाहिए  हम तो बहुत भाग्यशाली हैं की  यहाँ बारह के बारह महीने सूरज उगता है |सूरज की पहली व आखरी किरण दोनों ही भारत में उगती हैं मौसम व मिटटी के मामले में भी हमारा देश समृद्ध है|इस वजह से भी हमे भारत में जन्म लेने पर गर्व होना चाहिए  |

पहनावा

हमारा पारम्परिक परिधान धोती,कुरता व साड़ी रहा है| पर आज पाश्चात्य सभ्यता की देखा- देखी हमने कोट पेंट ,टाई बेल्ट ,जीन डालनी शुरू कर  दी| पर कभी ये नहीं जाना कीपाश्चात्य सभ्यता में इसे पहनने का   कारण क्या है हर देश का अपना पहनावा होता है जो वहां की जलवायु व भोगोलिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है| वहां की  जलवायु ठंडी है उन्हें ठंड से बचना है  इसलिए कोट ,पेंट पहनना उन देशों की मजबूरी है ,वहां ठंडी हवा चलती है इसलिए गले को बर्फीली हवा से बचाने के लिए उन्हें टाई लगनी पडती है  यह पहनावा उनकी परिस्थिति के अनुकूल है पर हमारे देश की जलवायु गर्म है यहाँ ये पहनावा पहनना अनुकूल नहीं है |पर हमने देखादेखी इसको अपना लिया है हमारे छोटे -छोटे बच्चे भी  टाई लगा कर स्कूल  जाते हैं  जिससे उनके गले की नसें दबने का भी  खतरा रहता है|यह ठीक है की सभ्यता प्रगतिशील है ,परिवर्तनशील है पर अपनाने योग्य बातों का ही   अनुकरण करना चाहिए |

खान-पान 

यूरोपीय देशों में ज्यादा सब्जियां नहीं उगती हैक्योंकि जलवायु अनुकूल नहीं है वहां  आलू ,प्याज ही  उगते हैं बाकि सब्जियां बाहर से आती हैं |वहां खाना बनाने की भी दिक्कत रहती है इसलिए  वहां बर्गेर , सैंडविच  ,हॉट डॉग आदि बनाये जाते हैं  जो  घर पर उपलब्ध सामान से व आसानी से बन जाते हैं| वहां औरतें भी घर पर  खाना नहीं बनाती  हैं|न ही वहां ताजे फल सब्जियां उपलब्ध होते हैंक्योंकि जलवायु अनुकूल नहीं है | ये फ़ास्ट फ़ूड खाना उनकी मजबूरी है पर हम उन्हें अँधा अनुकरण करते जा रहे हैं और दिखावे के चक्कर में ये बासी भोजन खा रहे हैं|

भाषा 

हमारे देश में तो अलग -अलग भाषाएँ बोली जाती हैं और हिंदी को हमारी राष्ट्र भाषा का दर्जा दिया  गया है पर फिर भी हमारे सभी कार्यालयों में हिंदी व अंग्रेजी दोनों भाषायों में काम  होता है कई जगह तो केवल अंग्रेज़ी ही प्रयोग होती है जबकि हमारी राष्ट्र भाषा हिंदी है और अनेक राजभाषाएं हैं |पश्चिम की तो भाषा ही अंग्रेजी है तो वहां तो काम  उसी भाषा में ही होगा |यह विचार तो हमे  ही करना होगा की हमे कितना अंग्रेजी का प्रयोग करना है |किसी विदेशी भाषा को कितनी प्रमुखता देनी है ये मापदंड तो हमे ही तय करने हैं |और अपनी राजभाषा को गौरव दिलाने की जिमेवारी भी हमारी ही है |

सफाई व्यवस्था 

एक अच्छाई जो हम विदेशों से सीख सकते हैं वह है सफाई वयवस्था-|  हम भारतीय जहाँ वहां थूक देते हैं ,कचरा डाल देते हैं वहीँ पश्चिम में छोटे बच्चे भी अपना कुढा डस्टबिन में डालते हैं|इस अच्छी आदत को हमें भी अपनाना चाहिएऔर अपने देश,राष्ट्र को स्वच्छ रखना चाहिए |

भ्रष्टाचार 

भारत में भ्रष्टाचार आजादी के बाद कई गुना बड़ा है ,हर तरफ कुशासन है|लेकिन पश्चिम के लोग इस मामले में बड़े इमानदार व कर्तव्य निष्ट   हैं |वो देश भक्ति का ढिंढोरा नही पीटते पर देशभक्ति करते हैं कोई भी ऐसा सामान ,वस्तु जो देश हित में न हो नहीं खरीदते |विकास का पैसा विकास पे ही खर्च होता है ,घोटालों घपलों पे नहीं |शायद ये भावना  ही उनके विकसित देश होने का कारण  है हमे भी हमारे देश के प्रति ऐसी वास्तविक देशभक्ति पैदा करनी होगी|

व्यवस्था व अनुशासन 

वयवस्था व अनुशासन अगर हम पश्चिम से सीखें तो अच्छा हो क्योंकि वहां के लोग देशप्रेमी इमानदार परिश्रमी व कर्मठ हैं ये कर्मठता उनके अपने देश के प्रति है अगर हम भीअपने  देश के प्रति जो हमारा कर्तव्य बनता है उसके प्रति  इमानदार हो जाएँ तो भ्रष्टाचार स्वत; खत्म हो जायेगा और देश का विकास होगा देश फिर से सोने की चिड़िया बन जायेगा |साथ ही ह्मे समय  का महत्व भी समझना होगा हमारे देश में लेट लतीफी बहुत है समय के पाबंद नहीं हैं अगर हमयह अच्छा गुण पश्चिमी सभ्यता से सीखें व  अनुशासित हो जाएँ तो कई समस्याएं खुद बखुद हल हो जाएँगी |

पारिवारिक व सामाजिक जीवन 

ये रखनायहाँ भारत में परिवार को सर्वोपरी माना जाता है पति, पत्नी का रिश्ता सात जन्मों का मानते हैं |वहीँ पश्चिम में काम की अधिकता के कारण शादियाँ टिकती नहीं हैं |एक साल भी इनका वैवाहिक जीवन नही निभता है इस मामले में हमारी सभ्यता महान  है हमे इस गौरवशाली सभयता को बना है|

धर्म, दान, पुनः

पश्चिम में लोग दानपुनःमें विश्वास नहीं करते इसलिए उनकी वेल्थ भी स्थायी नहीं है पर हम भारतीय दान पुनःक्र अपनी वेल्थ को कई गुना बढ़ाते  रहते हैं और धर्म में रूचि भी बचपन से ही लेना शुरू कर  देते हैं |

दोस्तों मेरा कहना ये है की हमने एक बहुत ऊँची संस्कृति में जन्म लिया है इसको बचाना व और  अधिक समृद्ध बनाना हर भारतीय की जिमेवारी बनती है |

धन्यवाद -written by SeemaArora

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Seema Arora from Haryana (India)

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